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अक्सर पेट की सर्जरी के दौरान या सर्जरी के बाद में अनपेक्षित रूप से अपेंडिक्स कैंसर का पता चलता है। यह दुर्लभ प्रकार के जीआई कैंसरों में से एक है, जिनका अगर जल्दी पता चल जाए तो सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
अपेंडिक्स एक थैली के आकार का अंग होता है, और यह गैस्ट्रोइन्टेस्टनल ट्रैक्ट (जठरांत्र मार्ग) का एक हिस्सा है। अपेंडिक्स कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जब अपेंडिक्स की परत में कोशिकाएं (सेल्स) असामान्य रूप से बढ़ने और विभाजित होने लगती हैं, तब अपेंडिक्स कैंसर होता है ।
अपेंडिक्स के कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना मुश्किल होता है। अपेंडिक्स कैंसर स्थानीय हो सकता है (केवल अपेंडिक्स तक सीमित), क्षेत्रीय (आसपास के लिम्फ टीशू (लसीका ऊतकों) में फैल सकता है) या घातक (दूर के अंगों में भी फैल सकता है)।
कार्सिनोइड्स की तुलना में एडेनोकार्सिनोमा अधिक सामान्य प्राथमिक कैंसर हैं। अपेंडिक्स में प्राइमेरी लिम्फोमा भी हो सकता है। इसके अलावा ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर, कोलोन (मलाशय ) कैंसर और फीमेल जेनिटल (महिलाओं के जननांग) कैंसर भी अपेंडिक्स तक फैलते देखे जा रहे हैं।
निम्नलिखित कुछ अपेंडिक्स ट्यूमर के प्रकार हैं :
इस प्रकार का कैंसर अपेंडिक्स में शुरू होता है। इसमें म्यूसिन नामक एक जेली जैसा पदार्थ पैदा करने का अनोखा गुणधर्म होता है, यह जेली जैसा पदार्थ कैंसर की कोशिकाओं (सेल्स) को शरीर के अन्य भागों में फैलने के लिए प्रेरित करता है। अक्सर, जब यह ट्यूमर पेरिटोनियम या पेट के विवर की परत में फैल जाते है तब इनका पता चलता हैं।
यह ज्यादा आम नहीं है, और इसके लक्षण म्यूसिनस एडेनोकार्सिनोमा जैसे ही होते हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज़ो में इस स्थिति के विकसित होने का खतरा अधिक होता है।
लगभग 66% अपेंडिक्स ट्यूमर कार्सिनॉइड ट्यूमर होते हैं। वे तब तक कोई लक्षण नहीं दिखाते जब तक कि वे विकसित चरणों तक नहीं पहुंच जाते। ये ट्यूमर हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं (सेल्स) में बनते हैं जो शरीर के लगभग हर अंग में मौजूद होती हैं। ज्यादातर मामलों में अपेंडिक्स कार्सिनॉइड ट्यूमर अपेंडिक्स के सिरे पर होता है। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर को भी कार्सिनॉइड ट्यूमर के तहत वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि यह भी हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं (सेल्स) से उत्पन्न होते हैं और इनका पता लगाना मुश्किल होता है।
यह अपेंडिक्स ट्यूमर के 10% मामलों के लिए जिम्मेदार होते है। आमतौर पर यह अपेंडिक्स के तल पर होता है। इसके लक्षण कोलोरेक्टल कैंसर के समान होते हैं। इस प्रकार के कैंसर पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता है, और आमतौर पर अपेंडिसाइटिस की सर्जरी के दौरान या सर्जरी के बाद में इसका पता चलता है।
यह एडेनोकार्सिनोमा का एक दुर्लभ और आक्रामक रूप है जिसका इलाज करना बहुत मुश्किल होता है। एक अपेंडिक्स तक ही सीमित एडेनोकार्सिनोमा के लिए, एपेंडेक्टोमी (वर्मीफॉर्म अपेंडिक्स को सर्जरी के माध्यम से हटाना) की सिफारिश की जाती है।
यह अपेंडिक्स ट्यूमर का एक दुर्लभ रूप है, और आमतौर पर यह सौम्य होता है। एपेन्डेक्टॉमी से इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
अपेंडिक्स कैंसर से जुड़े सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
अपेंडिक्स कैंसर किन कारणों से होता है, इस बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है; इसके अलावा, ऐसे किसी भी जोखिम कारकों की पहचान नहीं की गई हैं जिनको टाला जा सके । निम्नलिखित कुछ जोखिम कारक हैं जो अपेंडिक्स कैंसर से जुड़े हो सकते हैं:
उम्र : उम्र के साथ अपेंडिक्स कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर, जो कि अपेंडिक्स ट्यूमर का एक प्रकार है, वे पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम हैं।
अक्सर पेट की सर्जरी के दौरान या सर्जरी के बाद में अनपेक्षित रूप से अपेंडिक्स कैंसर का पता चलता है।
जब अपेंडिक्स कैंसर का संदेह होता है, तब डॉक्टर शारीरिक रूप से जांच कर सकते है और उस जगह पर हल्का दबाव डाल सकते है। होने वाला दर्द तेज और बदतर महसूस हो सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि अपेंडिक्स से जुड़ी कुछ असामान्यताएं हैं। निर्णायक निदान पर पहुंचने के लिए अधिक परीक्षण किए जाते हैं।
बायोप्सी के लिए, असामान्य ऊतकों की छोटी मात्रा को काटकर इकठ्ठा किया जाता है और माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी) के नीचे इसकी जांच कि जाती है। यदि सर्जरी के दौरान कैंसर का विकास देखा जाता है, जो कि अक्सर होता है, तो डॉक्टर उस अंग और उसके आसपास के ऊतकों के छोटे से हिस्से को निकाल सकते हैं और इसे जांच के लिए भेज सकते हैं।
सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन जैसे स्कैन ट्यूमर के विस्तार, आकार और सटीक स्थिति के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने में सहायता करते हैं। अपेंडिक्स कैंसर के निदान के लिए अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का एक और तरीका है। यह छवियों को संसाधित करने के लिए हाई – फ्रीक्वन्सी साउंड वेव (उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों ) का उपयोग करता है जो ट्यूमर के स्थान का पता लगाने में मदद करता है और बायोप्सी, एस्पिरेशन आदि जैसी अन्य नैदानिक प्रक्रियाओं को करने में डॉक्टरों की सहायता करता है।
जब न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर या कार्सिनॉइड ट्यूमर का संदेह होता है तब इस प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। रेडियोएक्टीव ऑक्ट्रोटाइड, जो सोमैटोस्टैटिन जैसी ही एक दवा है, उसको मरीज़ की नसों में इंजेक्ट किया जाता है। यह दवा जिनमें सोमैटोस्टैटिन के लिए रिसेप्टर्स होते हैं पूरे रक्तप्रवाह में संचारण करती है और ट्यूमर कोशिकाओं (सेल्स) को बांधती है । जहां रेडियोएक्टीव ऑक्टेरोटाइड जमा हो जाता है उन क्षेत्रों की तस्वीरों को प्राप्त करने के लिए एक विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से लीवर जैसे अंगों में कार्सिनॉइड ट्यूमर के प्रसार का पता लगाने में सहायक है।
निदान की पुष्टि हो जाने के बाद, डॉक्टर उपचार की योजना बनाना शुरू करते हैं, जिसमें ट्यूमर के प्रकार, रोग के चरण और मरीज़ की कुल स्थिति के आधार पर एक या एक से अधिक उपचार के तरीके शामिल किए जा सकते हैं।
अपेंडिक्स कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपचार प्रक्रिया है। आम तौर पर, अपेंडिक्स कैंसर निम्न-श्रेणी के और धीमी गति से बढ़ने वाले कैंसर होते हैं। ट्यूमर से जुड़े उसके चरण, आकार और अन्य मापदंडों के आधार पर अपेंडिक्स कैंसर के इलाज के लिए निम्नलिखित प्रकार की सर्जरी की जाती है :
अपेंडिक्स को निकालने के लिए की जाने वाली सर्जरी।
कार्सिनॉइड ट्यूमर जो 2 सेंटीमीटर से बड़े होते हैं उनको निकालने के लिए यह सर्जरी की जाती है । हेमिकोलेक्टोमी के दौरान, सर्जन अपेंडिक्स और कोलोन (मलाशय) के कुछ हिस्से को निकाल देते है।
आमतौर पर नान-कार्सिनॉइड ट्यूमर के लिए इस प्रक्रिया की सिफारिश की जाती है। साइटोरेडक्टिव सर्जरी के दौरान, ट्यूमर और उसके आसपास के तरल पदार्थ को निकाल दिया जाता है।
जिन मामलों में कैंसर पेट के अन्य भागों में फैल जाता है उन मरीज़ों में यह सर्जरी की जाती है । इसमें पेरिटोनियम जो पेट की परत होती है, उसको निकालना शामिल है।
जिन मामलों में अपेंडिक्स कैंसर उन्नत चरणों में होते हैं और जहां कैंसर पेट के अन्य हिस्सों में फैल गया है उन मामलों के लिए कीमोथेरेपी की सिफारिश की जाती है। कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) को बढ़ने और विभाजित करने की उनकी क्षमता को नष्ट करके मारने के लिए प्रभावशाली दवाओं का उपयोग करती है। समग्र उपचार की प्रभावकारिता को बढ़ाने के लिए इसका उपयोग अक्सर अन्य उपचार विधियों के संयोजन में किया जाता है।
अपेंडिक्स कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का उपयोग शायद ही कभी किया जाता है। इस प्रक्रिया में आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहूंचाकर ट्यूमर कोशिकाओं (सेल्स) को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए हाई – एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण किरणों) का उपयोग किया जाता है। कुछ मामलों में, जैसे कि हड्डियों में कैंसर के फैलने के कारण होने वाला दर्द, रेडिएशन थेरेपी का उपयोग लक्षणों (उपशामक देखभाल के रुप में) से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
हां, अपेंडिक्स के कैंसर का इलाज संभव है। एक उचित दृष्टिकोण के साथ, उन्नत चरण के कैंसर का भी इलाज किया जा सकता है और उसको सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ प्रबंधित किया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में, अपेंडिक्स कैंसर धीमी गति से बढ़ता है और निम्न श्रेणी का होता है, जिसके कारण आसानी से उसका इलाज किया जा सकता है। हालांकि, मरीज़ों के लिए सही विशेषज्ञ का चयन करना महत्वपूर्ण है, जो सटीक निदान और उचित उपचार में मदद कर सके।
अनुवांशिक या पारिवारिक कारकों की वजह से अपेंडिक्स कैंसर होने के कोई पर्याप्त सबूत नहीं है।
कोलोनोस्कोपी, जो एक एंडोस्कोपी प्रक्रिया है जिसका उपयोग कोलोन (मलाशय) की जांच करने के लिए किया जाता है, अपेंडिक्स कैंसर का पता लगाने में मदद कर सकती है। हालांकि, यह अपेंडिक्स कैंसर का पता लगाने के लिए मानक प्रक्रिया नहीं है और इस प्रक्रिया से शुरुआती चरण के ट्यूमर चूक सकते हैं । इसलिए, मानकीकृत पहचान और नैदानिक प्रक्रियाओं के लिए जाने की सिफारिश की जाती है। अंत में, डॉक्टर से बात करना हमेशा बेहतर होता है, जो सर्वोत्तम निदान पद्धति पर सही मार्गदर्शन देने में सक्षम होंगे।
मानटरिंग थेरेपी (चिकित्सा निगरानी) कैंसर के उपचार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। मानटरिंग थेरेपी (चिकित्सा निगरानी) प्रशासित कैंसर उपचार के लिए मरीज़ की प्रतिक्रिया का आकलन करने का एक तरीका है। यदि मरीज़ अच्छी प्रतिक्रिया दे रहा है, तो उपचार जारी रहेगा, और यदि उपचार के प्रति मरीज़ की प्रतिक्रिया खराब है, तो डॉक्टर सकारात्मक नैदानिक परिणाम प्राप्त करने के लिए उपचार योजना में बदलाव कर सकते हैं।
कैंसर के उपचार के बाद फालो - अप देखभाल की जाएगी, जिसमें मरीज़ों को उपचार समाप्त होने के बाद नियमित जांच करने के लिए कहा जाता है ताकि कैंसर रिलैप्स (पुनरावर्तन) हुआ है या नहीं यह पता लगाया जा सके। ये परीक्षण प्रारंभिक अवस्था में रिलैप्स (पुनरावर्तन) का पता लगाने और उचित देखभाल प्रदान करने में सहायता करते हैं।